MPESB Group 3 Sub Engineer ,Sahayak Manchitrakar
Published: October 9, 2026
Madhya Pradesh Employee Selection Board MPESB Released Group 3 Sub Engineer ,Sahayak Manchitrakar, Technician and Other Equivalent Combined Recruitment Test 2026. Those candidates who are interested in this MP ESB Group 3 Examination 2026 Can Apply Online from re Open 13/10/2026 to 27/10/2026. Read the notification for Recruitment eligibility, post information, selection procedure, age limit, Post list, Vacancy details, and all other informat
Application Begin: 01/01/1010
last: 01/01/2020
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ब का निर्वाण विक्रम संवत 1575
(सन 1518 ईस्वी) में माघ माह के शुक्ल
पक्ष की एकादशी तिथि को मगहर में हुआ था।
[8] प्रचलित मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, उस समय नकली ब्राह्मणों ने यह भ्रम संसार में फैला रखा था कि जो काशी में मरता है वह सीधा स्वर्ग जाता है और जो मगहर में मरता है वह नरक गमन करता है।
[9]जबकि वास्तविकता यह है कि सही विधि से भक्ति करने वाला कहीं भी
प्राण त्याग दे वह अपने सही स्थान पर जाता है। तो ब्राह्मणों द्वारा फैलायी इस भ्रांति को तोड़ने के लिए परमेश्वर कबीर साहेब ने काशी के सभी पंडित, ज्योतिषशास्त्रियों से कह दिया कि इस दिन वे मगहर
विक्रम संवत 1575 (सन 1518 ईस्वी) में माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मगहर में हुआ था।
[8] प्रचलित मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, उस समय नकली ब्राह्मणों ने यह भ्रम संसार में फैला रखा था कि जो काशी में मरता है वह सीधा स्वर्ग जाता है विक्रम संवत 1575 (सन 1518 ईस्वी) में माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मगहर में हुआ था।
[8] प्रचलित मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, उस समय नकली ब्राह्मणों ने यह भ्रम संसार में फैला रखा था कि जो काशी में मरता है वह सीधा स्वर्ग जाता है विक्रम संवत 1575 (सन 1518 ईस्वी) में माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मगहर में हुआ था।
[8] प्रचलित मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, उस समय नकली ब्राह्मणों ने यह भ्रम संसार में फैला रखा था कि जो काशी में मरता है वह सीधा स्वर्ग जाता है विक्रम संवत 1575 (सन 1518 ईस्वी) में माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मगहर में हुआ था।
[8] प्रचलित मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, उस समय नकली ब्राह्मणों ने यह भ्रम संसार में फैला रखा था कि जो काशी में मरता है वह सीधा स्वर्ग जाता है