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Published: October 9, 2026
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juyuieविक्रम संवत 1575 (सन 1518 ईस्वी) में माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मगहर में हुआ था।[8] प्रचलित मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, उस समय नकली ब्राह्मणों ने यह भ्रम संसार में फैला रखा था कि जो काशी में मरता है वह सीधा स्वर्ग जाता है विक्रम संवत 1575 (सन 1518 ईस्वी) में माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मगहर में हुआ था।[8] प्रचलित मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, उस समय नकली ब्राह्मणों ने यह भ्रम संसार में फैला रखा था कि जो काशी में मरता है वह सीधा स्वर्ग जाता है विक्रम संवत 1575 (सन 1518 ईस्वी) में माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मगहर में हुआ था।[8] प्रचलित मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, उस समय नकली ब्राह्मणों ने यह भ्रम संसार में फैला रखा था कि जो काशी में मरता है वह सीधा स्वर्ग जाता है
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विक्रम संवत 1575 (सन 1518 ईस्वी) में माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मगहर में हुआ था।[8] प्रचलित मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, उस समय नकली ब्राह्मणों ने यह भ्रम संसार में फैला रखा था कि जो काशी में मरता है वह सीधा स्वर्ग जाता है  विक्रम संवत 1575 (सन 1518 ईस्वी) में माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मगहर में हुआ था।[8] प्रचलित मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, उस समय नकली ब्राह्मणों ने यह भ्रम संसार में फैला रखा था कि जो काशी में मरता है वह सीधा स्वर्ग जाता है    विक्रम संवत 1575 (सन 1518 ईस्वी) में माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मगहर में हुआ था।[8] प्रचलित मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, उस समय नकली ब्राह्मणों ने यह भ्रम संसार में फैला रखा था कि जो काशी में मरता है वह सीधा स्वर्ग जाता है
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विक्रम संवत 1575 (सन 1518 ईस्वी) में माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मगहर में हुआ था।[8] प्रचलित मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, उस समय नकली ब्राह्मणों ने यह भ्रम संसार में फैला रखा था कि जो काशी में मरता है वह सीधा स्वर्ग जाता है विक्रम संवत 1575 (सन 1518 ईस्वी) में माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मगहर में हुआ था।[8] प्रचलित मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, उस समय नकली ब्राह्मणों ने यह भ्रम संसार में फैला रखा था कि जो काशी में मरता है वह सीधा स्वर्ग जाता है विक्रम संवत 1575 (सन 1518 ईस्वी) में माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मगहर में हुआ था।[8] प्रचलित मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, उस समय नकली ब्राह्मणों ने यह भ्रम संसार में फैला रखा था कि जो काशी में मरता है वह सीधा स्वर्ग जाता है विक्रम संवत 1575 (सन 1518 ईस्वी) में माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मगहर में हुआ था।[8] प्रचलित मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, उस समय नकली ब्राह्मणों ने यह भ्रम संसार में फैला रखा था कि जो काशी में मरता है वह सीधा स्वर्ग जाता है
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